बिनसर महादेव मंदिर और उससे जुड़ी रोचक कथाएं।

बिनसर महादेव मंदिर भारत के उत्तराखंड में स्थित है और यह एक प्राचीन हिन्दू मंदिर है जो हिमालय के प्रशांत पहाड़ियों में स्थित है। यहां का सुंदर प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक महत्ता के कारण यह स्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल है।


बिनसर महादेव मंदिर का निर्माण विशेष रूप से काशीनाथ के महादेव के एक पूजारी नारायण स्वरूप द्वारा किया गया था। इस मंदिर का निर्माण सन् 9 वीं शताब्दी में हुआ था और यह अपने सुंदर स्थल और ऐतिहासिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर का नाम "बिनसर" स्थानीय भाषा में "बीना" और "सर" के शब्दों से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'बीना का सिर'।


इस मंदिर की विशेषता उसके शिवलिंग मूर्ति में है, जो सफेद चट्टान से बना है और इसे "वनदेवी मूर्ति" के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर की स्थानीय धार्मिक परंपरा में यह मान्यता प्राप्त है कि इस लिंग को राजा बाणसेन ने अपने पुत्र बीना के लिए स्थापित किया था। इसे विशेष रूप से "बारिकुट पीठ" भी कहा जाता है, जो इसकी महत्वपूर्णता को दर्शाता है।


मंदिर का स्थान और परिवर्तनशील प्राकृतिक सौंदर्य के कारण, यह धार्मिक और आध्यात्मिक आत्मा को महसूस करने के लिए एक अद्वितीय स्थल है। यहां के उत्सव, पूजा-अर्चना, और स्थानीय त्योहार भी भक्तों को आकर्षित करते हैं।

बिनसर महादेव मंदिर की पौराणिक कहानियाँ :-
बिनसर महादेव मंदिर के चारों ओर बसी हुई कई पौराणिक कहानियाँ हैं, जिन्होंने इस स्थान को धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता के साथ जोड़ा है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण पौराणिक कथाएँ हैं:

1. बाणसेन और बीना की भक्ति :-
बिनसर का नाम बाणसेन के पुत्र बीना के नाम पर रखा गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, बाणसेन एक भक्तिशील राजा था जो शिव के प्रति अत्यंत श्रद्धाभाव रखता था। उसकी भक्ति में इतना विश्वास था कि उसने अपने पुत्र का नाम बीना रखा, जिसे शिवलिंग की पूजा के लिए प्रेरित किया था। इस पौराणिक कथा के अनुसार, शिव ने बाणसेन की भक्ति को प्रसन्नता से देखकर बीना के लिए एक विशेष शिवलिंग स्थापित किया जो बाद में बिनसर महादेव मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

2. बिनसर का रहस्यमय संबंध :-
एक और पौराणिक कथा के अनुसार, बिनसर का स्थान शिव-पार्वती के एक गुप्त सम्बंध से जुड़ा है। यह कहानी कहती है कि जब पार्वती ने शिव के साथ खेलते हुए उनका एक रहस्यमय रूप देखा, तो वह भयभीत हो उसे छुपाने के लिए बिनसर की ओर बढ़ीं। शिव ने पार्वती के इस व्यवहार को देखा और उन्होंने बिनसर को अपना एक विशेष स्थान माना, जहां वह अपने भक्तों के साथ अपना रहस्यमय स्वरूप प्रकट करते हैं। इस कथा के अनुसार, बिनसर का स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और भगवान के साथ एकता की भावना से भरा हुआ है।


3. वनदेवी मूर्ति की उत्पत्ति :-
बिनसर महादेव मंदिर में विराजमान वनदेवी मूर्ति की उत्पत्ति से जुड़ी एक अन्य पौराणिक कहानी है। यह कहानी कहती है कि एक समय बानसेन ने वनों में एक सुंदर स्थल पर शिव पूजा की थी, और वहां शिव की कृपा से उन्हें एक सुंदर सफेद चट्टान मिली जिसका उन्होंने मूर्ति बनाने का निर्णय लिया। बानसेन ने उस स्थान पर शिवलिंग स्थापित किया और उस चट्टान से मूर्ति बनवाई, जिसे वह वनदेवी मूर्ति के रूप में पूजते हैं। इस मूर्ति की उपस्थिति से मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है, और इसे भक्तों द्वारा बड़े श्रद्धा भाव से पूजा जाता है।


4. बिनसर में वनवास का अनुभव :-
एक और कथा के अनुसार, बिनसर में वनवास का अनुभव एक तपस्वी ब्राह्मण के साथ जुड़ा है। यह ब्राह्मण वहां तपस्या कर रहा था और वहां के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेता था। उसने वहां ध्यान लगाकर शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया और उसने बिनसर को एक आध्यात्मिक स्थल के रूप में माना। इस कथा के अनुसार, बिनसर में ध्यान और तप का स्थान होने के कारण यह स्थान धार्मिक आत्मा के लिए एक आदर्श स्थल बना हुआ है।


इस रूप में, बिनसर महादेव मंदिर की पौराणिक कहानियाँ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से इस स्थान के महत्त्व को और भी रूपरेखित करती हैं। ये कहानियाँ इस मंदिर के प्रति भक्ति और आदर की भावना को और भी मजबूत करती हैं, जिससे यह स्थल धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनता है।

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